{"title":"Ramnath 'Suman'","description":"","products":[{"product_id":"galib-hindi-book-ramnath-suman","title":"Galib (Hindi Book) | Ramnath 'Suman'","description":"\u003ch2\u003eGalib (Hindi Book) | Ramnath 'Suman'\u003c\/h2\u003e\n\u003cp\u003eGalib (Hindi Book) | Ramnath 'Suman'\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cbr\u003eपूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या? किसी के लिए भी ग़ालिब का व्यक्तित्व और कृतित्व समझ लेना, समझा देना आसाँ नहीं है। यौवन की तरंगों का यह रंगीन शाइर बाहर से जितना मोहक है, भीतर से उतना ही जटिल और विविध भी। ग़ालिब का काव्य-लोक सामुद्रिक संसार की तरह उलझा, विचित्र और खूबसूरत है-कहीं भावनाएँ शीशे की तरह पारदर्शी और कहीं कल्पनाएँ आँख पर उठ आयी जल की उज्ज्वल परतों की तरह पवित्र एवं पाठक को डबडबा देनेवालीं। ग़ालिय के बारे में सबसे क्रीमती बात निःसंकोच यह कही जा सकती है कि वो अपने जीवन-दर्शन में आधुनिक और अधुनातन खूबियाँ समाविष्ट किये हुए हैं और इसीलिए आज भी महान हैं, आज भी पहले से अधिक लोकप्रिय । रामनाथ सुमन ने प्रस्तुत ग्रन्थ में बस किया क्या है कि बहुत अधिक लोकप्रिय इस महाकवि की रहस्य में छपी ऊँचाइयों को अपनी पैनी प्रतिभा से पूरी तौर पर अफशाँ कर दिया है-बचा शायद बहुत कम होगा, पाठक स्वयं देखेंगे। प्रस्तुत है ग़ालिब का यह नया संस्करण। \u003c\/p\u003e","brand":"Akshardhara Book Gallery","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":50504732705090,"sku":"978-93-5775-506-1","price":395.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0800\/1214\/9058\/files\/galib_ramnath_suman-1.jpg?v=1744610106"},{"product_id":"meer-hindi-book-ramnath-suman","title":"MEER (Hindi Book) | Ramnath 'Suman'","description":"\u003ch2\u003eMEER (Hindi Book) | Ramnath 'Suman'\u003c\/h2\u003e\n\u003cp\u003eBook by Ramnath 'Suman' | Published by Vani Prakashan\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eमीर \u003cbr\u003eउर्दू-काव्य से मीर को निकाल दीजिए तो जैसे गंगा को हिन्दुस्तान से निकाल दिया। मीर में अनुभूति की गहराइयाँ तड़पती हैं, वहाँ दिल का दामन आँसुओं से तर है। मीर में एक अजब-सी खुदफ़रामोशी है, एक बाँकपन, एक अकड़, एक फ़क़ीरी तथा ज़वान की वह घुलावट है, जो किसी दूसरे को नसीब नहीं हुई। \u003cbr\u003eबिना डूबे मीर को पाना मुश्किल है। 'संहल है मीर को समझना क्या, हर सुखन उसका एक मुकाम से है'। सर्वांगीण समीक्षा के साथ इस पुस्तक में मीर नज़दीक से व्यक्त हुए हैं। सुमनजी लगभग चालीस वर्षों तक उर्दू-काव्य के गहन अध्येता रहे। उनमें गहरी पकड़ थी, वह कवि के मानस में उतरते थे। \u003cbr\u003eमीर के इस अध्ययन को, जो सुमनजी की पैनी दृष्टि से गुज़रकर आया है, पढ़कर आपको मीर के सम्बन्ध में उर्दू में कुछ पढ़ने को नहीं रह जाता, क्योंकि इसमें मीर पर हुए सम्पूर्ण अद्यतन श्रम का समावेश है। प्रस्तुत है पुस्तक का नया संस्करण । \u003c\/p\u003e","brand":"Akshardhara Book Gallery","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":50504772649282,"sku":"978-93-5775-982-3","price":395.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0800\/1214\/9058\/files\/MEER_Hindi_Book_Ramnath_Suman__1.jpg?v=1744612983"}],"url":"https:\/\/akshardhara.com\/collections\/ramnath-suman.oembed","provider":"Akshardhara Book Gallery","version":"1.0","type":"link"}