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Gaban (गबन)
Gaban (गबन)
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Author: Premchand
Publisher: Eka Classics
Pages: 317
Edition: Latest
Binding: Paperback
Language:Hindi
Translator:
गबन
गबन
हिंदी साहित्य के युगपुरुष प्रेमचंद द्वारा लिखित यह उपन्यास भारतीय सामाजिक संरचना कि वास्तविकताओ को सहानुभूति और सटिकता के साथ चित्रित करत है । गबन रामनाथ नामक एक साधारण क्लर्क की कहाणी है, जो अपनी पत्नी जालपा की आभूषणो की इच्छा को पुरा करने के लिए अनैतिक तरीके आपणाने के लिये तैयार हो जाता है, जिससे न केवल उनके व्यक्तीगत संबंध प्रभावित होते है बल्की अंत में रामनाथ को अपमानित होना पडता है।
सामाजिक रूप से अपमानित होने से बचने के लिया वह कलकत्ता भाग जाता है| लेकिन मुसीबते उस्का पिछा नहीं छोडती और वाह भारत कि न्यायिक प्रणाली के चक्रव्यूह में फस जाता है, तथा पुलिस अधिकारियों के भ्रष्टाचार, क्रूरता और अमानवीयता का साक्षी बनता है| पश्चाताप करते हुए जालपा भी उसकी तलाश में कलकत्ता पहुच जाती है और उसे जेल से निकालाने में मदद करती है| वह पुलिस की तानशाही के खिलाफ एक महान जनजागरण का सक्रिय हिस्सा भी बनती है|
प्रकाशक. एका प्रकाशन
लेखक. प्रेमचंद
