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Kaili Kamini Aur Anita ( कैली कामिनी और अनीता )

Kaili Kamini Aur Anita ( कैली कामिनी और अनीता )

Regular price Rs.315.00
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Author: Amrita Pritam

Publisher: Rajpal And Sons

Pages: 271

Edition: Latest

Binding: Paperback

Language:Hindi

Translator:---

कैली कामिनी और अनीता 

अनीता 'एक थी अनीता’ उपन्यास की नायिका है जिसके पैरों के सामने कोई रास्ता नहीँ, लेकिन वह चल देती हैं – कोई आवाज़ हैं, जाते कहां से उठतीं है और उसे बुलाती है... केली 'रंग का पत्ता' उपन्यास की नायिका हैं, एक गांव की लड़की और कामिनी "दिल्ली की गलियां' उपन्यास की नायिका है, एक पत्रकार। इनके हालात में स्थाई समानता नहीं, वे बरसों की जिन संकरी गलियों से गुजरती है, वे भी एक दूसरी की पहचान में नहीं आ सकती। लेकिन एक चेतना है, जो इन तीनो के अंतर से एक सी पनपती हैl वक्त कब और कैसे एक करवट लेता यह तीन अलग-अलग वार्ताओं की अलग-अलग जमीन की बात है। लेकिन इन तीनों का एक साथ प्रकाशन, तीन अलग-अलग दिशाओं से उस एक व्यथा को समझ लेने जैसा है, जो एक जर्जर बन कर उनके प्राणों में धड़कती है। मुहब्बत से बडा जादू इस दुनिया में नहीं हैं। उसी जादू से लिपटा हुआ एक किरदार कहता है - "इस गांव में जहां कैली बसती है, मेरी मुहब्बत की लाज बसती है' और इसी जादू से लिपटा हुआ कोई ओर किरदार कहता है-"प्रिय तुम्हें देखा तो मैंने खुदा की जात पहचान ली " जब कहीं कोई आवाज़ नहीं, किसी को अहसास होता हैं कि कुछेक क्षण थे, कुछेक स्पर्श ओर कुछेक कम्पन, और वे सब किसी भाषा के अक्षर थे, कुछ पल ऐसे भी होते है, जो भविष्य से टूटे हुए होते है, फिर भी सांसों म बस जाते है, प्राणी से धड़कते है शमां की तरह जलती पिघलती सोचती है यहीं तो आग की एक लपट है, जिसकी रोशनी में खुद को पहचाना है...' - अमृता प्रीत

प्रकाशक : राजपाल एंड सन्ज 

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