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Bahut Door, Kitna Door Hota Hai (बहुत दूर, कितना दूर होता है)

Bahut Door, Kitna Door Hota Hai (बहुत दूर, कितना दूर होता है)

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Author: Manav Kaul

Publisher: Hind Yugm

Pages: 160

Edition: Latest

Binding: Paperback

Language:Hindi

Translator:

Bahut Door, Kitna Door Hota Hai (बहुत दूर, कितना दूर होता है)

मानव कौल के जीवन को उनके लिखे के बहाने समझा जा सकता है। एक लेखक का लिखा किस तरह उसके जीवन और लेखन में यात्रा कर रहा होता है उसे मानव की किताबों से गुज़रते हुए गुना जा सकता है। मानव की यह लेखन यात्रा 15 किताबों तक पहुँच चुकी है—'ठीक तुम्हारे पीछे' (कहानियाँ), 'प्रेम कबूतर' (कहानियाँ), 'तुम्हारे बारे में' (न कविता, न कहानी), 'बहुत दूर, कितना दूर होता है' (यात्रा-वृत्तांत), 'चलता-फिरता प्रेत' (कहानियाँ), 'अंतिमा' (उपन्यास), 'कर्ता ने कर्म से' (कविताएँ), 'शर्ट का तीसरा बटन' (उपन्यास), 'रूह' (यात्रा-वृत्तांत), 'तितली' (उपन्यास), 'टूटी हुई बिखरी हुई' (उपन्यास), 'पतझड़' (उपन्यास), 'कतरनें' (न कविता, न कहानी), 'साक्षात्कार' (उपन्यास) और 'संयम' (उपन्यास)। यह किताब एक नए और अलग क़िस्म का यात्रा-वृत्तांत लेखन है। इस किताब में मानव कौल ने मई से जून 2019 के बीच यूरोप के अलग-अलग स्थानों पर की गई अपनी एकल यात्रा को दर्ज किया है।

लेखक: मानव कौल 
प्रकाशक: हिन्द युग्म 

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