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Gulamgiri (Hindi Book) | Mahatma Jyotiba Phule

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Author: Mahatma Jyotiba Phule

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Language:Hindi

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Gulamgiri (Hindi Book) | Mahatma Jyotiba Phule 

जोतीराव गोविन्दराव फुले (11 अप्रैल 1827-28 नवम्बर 1890) ज्योतिबा फुले के नाम से प्रचलित 19वीं सदी के एक महान भारतीय विचारक, समाजसेवी, लेखक, दार्शनिक तथा क्रान्तिकारी कार्यकर्ता थे। सितम्बर 1878 में इन्होंने महाराष्ट्र में 'सत्य शोधक समाज' नामक संस्था का गठन किया। महिलाओं व दलितों के उत्थान के लिए इन्होंने अनेक कार्य किये। समाज के सभी वर्गों को शिक्षा प्रदान करने के ये प्रबल समर्थक थे। इनका विवाह 1840 में सावित्री बाई से हुआ, जो बाद में स्वयं एक मशहूर समाजसेवी बनीं। दलित व स्त्री शिक्षा के क्षेत्र में दोनों पति-पत्नी ने मिलकर काम किया। ज्योतिबा फुले भारतीय समाज में प्रचलित जाति आधारित विभाजन और भेदभाव के खिलाफ थे। उन्होंने विधवाओं और महिलाओं के कल्याण के लिए काफी काम किया। उन्होंने इसके साथ ही किसानों की हालत सुधारने और उनके कल्याण के लिए भी काफी प्रयास किये। महात्मा ज्योतिबा व उनके संगठन के संघर्ष के कारण सरकार ने 'एग्रीकल्चर एक्ट' पास किया। स्त्रियों की दशा सुधारने और उनकी शिक्षा के लिए ज्योतिबा ने 1851 में एक स्कूल खोला। यह इस काम के लिए देश में पहला विद्यालय था। लड़कियों को पढ़ाने के लिए अध्यापिका नहीं मिली तो उन्होंने कुछ दिन स्वयं यह काम करके अपनी पत्नी सावित्री को इस योग्य बना दिया। उनकी समाजसेवा देखकर 1888 ई. में मुम्बई की एक विशाल सभा ने उन्हें 'महात्मा' की उपाधि दी। ज्योतिबा ने ब्राह्मण-पुरोहित के बिना ही विवाह-संस्कार आरम्भ कराया और इसे मुम्बई हाईकोर्ट से भी मान्यता मिली। वे बाल-विवाह विरोधी और विधवा-विवाह के समर्थक थे। अपने जीवन काल में उन्होंने धर्म, समाज और परम्पराओं के सत्य को सामने लाने हेतु तृतीय रत्न, छत्रपति शिवाजी, राजा भोसला का पखड़ा, ब्राह्मणों का चातुर्य, किसान का कोड़ा, अछूतों की कैफियत जैसी अनेक पुस्तकें लिखीं।

 

 

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