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Himalaya Mein Terah Maas (हिमालय में तेरह मास )
Himalaya Mein Terah Maas (हिमालय में तेरह मास )
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Author: OM SWAMI
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Publisher: Manjul
Pages: 172
Edition: Latest
Binding: Paperback
Language:Hindi
Translator: ---
हिमालय में तेरह मास
'मेरा हृदय केवल अलौकिक शांति के कारण हर्ष से प्रफुल्लित नहीं था। इसका कारण था मुक्ति। मैं अपने आस-पास मौजूद लोगों के बंधनों में जकड़ा हुआ नहीं था, न ही संसार की उन चीजों ने मुझे बांध रखा था जहाँ स्वयं को उनके अनुकूल ढालना पड़ता है। कोई सांसारिक बंधन नहीं, कोई दिखावा नहीं, समय की कोई सीमा नहीं, कोई बैठक नहीं, केवल आप और आपका संसार। परंतु ऐसा नहीं कि इस मुक्ति मात्र ने ही मेरे भीतर हर्ष के सतत भाव को आत्मिक परमानंद में रूपांतरित किया था। मुझे लगता है कि उसमें आशा का योगदान था। मुझे न केवल विश्वास था कि देवी माँ सचमुच हैं, अपितु यह आशा भी थी कि वे अवश्य आएँगी। मुझे यह भरोसा था कि मैं दिन-रात उनके स्वरूप का ध्यान करूँगा और एक दिन वे प्रकट हो जाएँगी। शास्त्रों में यही कहा गया है।'
लेखक : ओम स्वामी
प्रकाशन : मंजुळ प्रकाशन
