Akshardhara Book Gallery
Patjhad (पतझड)
Patjhad (पतझड)
Couldn't load pickup availability
Author: Manav Kaul
Share
Publisher: Hind Yugm
Pages: 238
Edition: Latest
Binding: Paperback
Language:Hindi
Translator:
Patjhad (पतझड)
मैं बस ये कहना चाह रहा था कि अगर मैं किताब नहीं पढ़ता, अगर मैं इन दोनों जगहों पर नहीं जाता तो शायद मैं पिछली बार की तरह यूँ ही, पूरे म्यूज़ियम से टहलते हुए बाहर निकल आता। पहली बार उनके चित्रों के रंग मुझे अपनी तरफ़ खींच रहे थे, उनके ब्रश स्ट्रोक- अकेलापन, पीड़ा, प्रेम सारे कुछ से सने हुए थे। उनकी हर तस्वीर, तस्वीर बनाने की प्रक्रिया भी साथ लेकर चलती है। मैं उनकी पेंटिंग Weeping Nude के सामने जाने कितनी देर खड़ा रहा! Munch के सारे रंगों को जानता था, वो मेरे वन के रंग थे, वो मेरे अकेलेपन, कमीनेपन के रंग थे, अगर कोई पूछे कि गहरी उदासी कैसी होती है तो मैं Munch की किसी पेंटिंग की तरफ़ ही इशारा करूँगा।
लेखक: मानव कौल
प्रकाशक: हिन्द युग्म
