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Tilak : Samrajya Ka Sabse Bada Shatru (तिलक : साम्राज्य का सबसे बडा शत्रु)

Tilak : Samrajya Ka Sabse Bada Shatru (तिलक : साम्राज्य का सबसे बडा शत्रु)

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Author: Vaibhav Purandare

Publisher: penguin books

Pages: 462

Edition: Latest

Binding: Paperback

Language:Hindi

Translator:

तिलक : साम्राज्य का सबसे बडा शत्रु

महात्मा गांधी के आने से पहले अगर किसी ने भारत की आज़ादी की लौ जलाई, तो वे थे बाल गंगाधर तिलक। लंदन के मशहूर अखबार द टाइम्स ने उन्हें 'भारतीय अशांति का जनक' कहा था। एक ब्रिटिश मंत्री, एडविन मोंटेग्यू ने भी माना कि भारतीयों पर तिलक का सबसे ज़्यादा असर था। ब्रिटिश सरकार तो उन्हें अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानती थी और उन पर तीन बार देशद्रोह का मुक़दमा भी चलाया था। तिलक को 'लोकमान्य' यानी 'लोगों में सबसे ज़्यादा इज़्ज़तदार' कहा जाता था। उन्होंने आज़ादी की लड़ाई को सिर्फ पढ़े-लिखे लोगों की बात से निकालकर आम लोगों का आंदोलन बना दिया। उनके काम और बेबाक विचार अंग्रेज़ों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गए। जब अंग्रेज़ भारतीयों को 'असभ्य' कहकर अपमानित कर रहे थे, तब तिलक ने ज़ोर देकर कहा कि भारत का इतिहास, उसकी संस्कृति और सभ्यता बहुत महान है। वैभव पुरंदरे की यह किताब सिर्फ एक नेता के बारे में नहीं है, बल्कि उस हिम्मत और जज़्बे के बारे में है जो आज भी भारत की आत्मा में है।

लेखक. वैभव पुरंदरे 
प्रकाशक. पेंगुइन बुक्स 

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